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कमजोर हो जाना sentence in Hindi

pronunciation: [ kamajor ho jana ]
कमजोर हो जाना meaning in English

Examples

  1. भ्रष्टाचार में निरंतर बढ़ोतरी होने का सीधा सीधा तात्पर्य यह माना जा सकता है कि देश में संचालित व्यवस्था का कमजोर हो जाना है, यह कहना अतिश्योक्तिपूर्ण नहीं होगा कि न्यायपालिका, कार्यपालिका व व्यवस्थापिका इन तीनों महत्वपूर्ण अंगों के संचालन में कहीं न कहीं प्रत्यक्ष अथवा अप्रत्यक्ष रूप से भ्रष्टाचार का समावेश हो जाना है अन्यथा यह कतई संभव नहीं कि भ्रष्टाचार निरंतर बढ़ता रहे और भ्रष्टाचारी मौज करते रहें ।
  2. पुरुष रोगों से सम्बंधित लक्षण-रात को सोते समय गन्दे सपने देखने के कारण लिंग में उत्तेजना बढ़ जाना और व्यक्ति को स्वप्नदोष हो जाना, रोगी को कमजोरी और नपुसंकता होना, ज्यादा संभोगक्रिया करने के कारण होने वाले रोग जैसे याददाश्त कमजोर हो जाना, अंगों का सुन्न हो जाना, आधी नींद के दौरान कामोत्तेजना का तेज होना जैसे लक्षणों में रोगी को काली ब्रोमैटम औषधि का प्रयोग कराने से लाभ होता है।
  3. मन से सम्बंधित लक्षण-रोगी व्यक्ति का किसी भी दूसरे व्यक्ति से बात करने का मन न करना, थोड़ी सी मेहनत करते ही थक जाना, स्त्रियों में हिस्टीरिया रोग हो जाना, बहुत ज्यादा चिड़चिड़ा हो जाना, हर समय डरते से रहना, दूसरे लोगों से शर्माना, याददाश्त कमजोर हो जाना, रात को सोने पर नींद का न आना जैसे लक्षणों के आधार पर रोगी को काली फास्फोरिकम औषधि देने से लाभ मिलता है।
  4. -गले की खराबी, पाचन तंत्र कमजोर हो जाना, फेफडे कमजोर होजाने पूरी सांस न ले पाना, चलने-सीढी चढने में सांस फूलने लगना, ठीक से नींद न आना, रोग प्रतिरोधक क्षमता घट जाना, सर्दी-गर्मी ज् यादा लगना, ठंठ और ठंठी चीजों से एलर्जी हो जाना, आये दिन कफ-खांसी से दोचार होना, मानसिक एकाग्रता में कमी और स् वभाव का चिडचिडा हो जाना जैसी अन् यान् य कई बीमारियां धूम्रपान की सीध देन होती हैं।
  5. नाक और गले के पीछे के भागों से रेशेदार बलगम का आना, गर्दन की पेशी का सख्त हो जाना, शरीर के जोड़ों का कमजोर हो जाना, भारी वजन को उठा पाना, गठिया का पुराना रोग, जीभ पर सफेद सी परत का जम जाना, पेशाब का रंग गाढ़ा लाल सा होना, कमर में दर्द, नितंबों के जोड़ों में दर्द और कलाइयों में दर्द आदि रोगों के लक्षणों में गेटि्सबर्ग वाटर औषधि बहुत ही अच्छा असर करती है।
  6. शरीर के बाहरी अंगों से सम्बंधित लक्षण-हाथ-पैरों का सुन्न हो जाना, पेशियों का कमजोर हो जाना, शरीर के सारे जोड़ ढीले पड़ जाना, जांघों के आगे के हिस्से की हडि्डयों में दर्द होना, पैरों के तलुओं में ऐंठन आना, पैरों के अंगूठों का सूजकर लाल हो जाना, हाथ-पैरों और हडि्डयों में जलन के साथ दर्द होना आदि लक्षणों के आधार पर अगर रोगी को कार्बो वेजिटैबिलस औषधि दी जाए तो रोगी को काफी लाभ पहुंचता है।
  7. दिल से सम्बंधित लक्षण-जो लोग तंबाकू का सेवन ज्यादा करते है उन लोगों को होने वाले रोग जैसे सीने में दर्द होना, दिल की धड़कन का अनियमित होना जैसे कभी बहुत धीरे से और कभी बहुत तेजी से, दिल में पानी भर जाना, निम्न रक्तचाप (लो ब्लड प्रेशर), हिस्टीरिया रोग से ग्रस्त रोगियों का दिल कमजोर हो जाना आदि लक्षणों में रोगी को स्पार्टियम स्कोपैरियम-सिस्टिसस स्कोपैरियस औषधि देने से रोगी कुछ ही दिनों में स्वस्थ हो जाता है।
  8. बालों के झड़ने अथवा गंजेपन के कई कारण है जैसे बालों की जड़ों का कमजोर हो जाना, पिट्यूटरी ग्लैंड(पियूस ग्रंथि) में हार्मोन्स की कमी, सिर पर रुसी की अधिकता, बालों की जड़ों में पोषक तत्वों की कमी, क्रोध, शोक, चिंता, अधिक मानसिक परिश्रम, अधिक गरम भोजन, सिर में बढ़ती गर्मी, भोजन में विटामिंस मिनिरल्स, रेशा एवं आभ्यंतर रस हार्मोन्स की कमी, लगातार सिर दर्द रहने से रक्त संचार में कमी, भोजन का सही ढंग से न पचना, सिर के स्नायुओं में प्राण प्रवाह की कमी.
  9. रोगी को अचानक कोई बुरी खबर मिलने के कारण सदमा सा बैठ जाना, रोगी में बहुत ज्यादा उत्तेजना बढ़ जाना, रोगी का हर समय डरा-डरा सा रहना जैसे कि कोई उसे मारने आ रहा हो, रोगी को डर के मारे दस्त हो जाना, रोगी की सोचने-समझने की शक्ति बिल्कुल कमजोर हो जाना, अगर कोई व्यक्ति रोगी के पास आता है तो रोगी गुस्से में आ जाता है वो हर समय अकेला ही रहना चाहता है जैसे मानसिक रोगों के लक्षणों में रोगी को जेलसिमियम निटिडम औषधि देना बहुत ही लाभकारी रहता है।
  10. सांस की नली में सूजन आ जाना, दम सा घुटता हुआ महसूस होना, दमा रोग होने के साथ-साथ बहुत ज्यादा मात्रा में चिपचिपा सा बलगम निकलना, सोते ही सांस का बन्द हो जाना, रात को सोते समय अचानक चौंक कर उठ बैठना, लेटे-लेटे सांस लेने में परेशानी होना, काली खांसी होने के साथ-साथ बहुत ज्यादा मात्रा में बलगम का निकलना, सांस की नलियों से सख्त तथा सफेद रंग का बलगम सा निकलना, दिल का कमजोर हो जाना आदि लक्षणों में रोगी को ग्रिण्डेलिया औषधि का सेवन कराने से लाभ मिलता है।
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