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सम्भाल कर रखना sentence in Hindi

pronunciation: [ sambhal kar rakhana ]
सम्भाल कर रखना meaning in English

Examples

  1. आपके अनुसंधान से काफ़ी महत्त्वपूर्ण जानकारी प्राप्त होती है, और इसे इस तरह से सम्भाल कर रखना चाहिए की सही वक्त पर उसे शीघ्रतापूर्वक प्राप्त किया जा सके।
  2. फिटनेस विशेषज्ञ के अनुसार अगर आपको अपनी अंदरूनी शक्ति को बढ़ाना है और सेक्स ताकत को सम्भाल कर रखना चाहते हैं तो रोजाना व्यायाम करना बहुत ही आवश्यक है।
  3. ' ' सम्यक् करणं संस्कृति ''-प्रकृति की दी हुई भद्दी, मोटी कुदरती चीज को सुन्दर बनाना, सम्भाल कर रखना, अधिक उपयोगी और श्रेष्ठ बनाना उसकी संस्कृति है ।।
  4. घर के पूरे हिन्दी परिवेश में इन बच्चों ने भी कम से कम आठवीं तक सैकड़ों कहानी, कार्टून की किताबें, पत्रिकायें हिन्दी की पढ़ी हैं और अभी भी वे उन्हें सम्भाल कर रखना चाहते हैं।
  5. सबको पता चलना चाहिए कि गीता जैसा अमृत-कलश सारी दुनिया के मनुष्यों के लिए स्वयं भगवान का दिया हुआ एक अनमोल उपहार है, जिसे न सिर्फ हमें सम्भाल कर रखना है, बल्कि उसका प्रचार-प्रसार भी करना है.
  6. मैं यह नहीं कहता कि हर विषय पर हमारी सोच या पश्चिमी सोच बेहतर या घटिया है, पर यह मानता हूँ कि भिन्न विचारों का होना मानव सभ्यता की धरोहर है और इस विभिन्नता को सम्भाल कर रखना चाहिये, खोने नहीं देना चाहिये.
  7. मैं यह नहीं कहता कि हर विषय पर हमारी सोच या पश्चिमी सोच बेहतर या घटिया है, पर यह मानता हूँ कि भिन्न विचारों का होना मानव सभ्यता की धरोहर है और इस विभिन्नता को सम्भाल कर रखना चाहिये, खोने नहीं देना चाहिये.
  8. आमने सामने की मुलाकात के बावजूद हमें खत किताबत की जरुरत भी पडने लगी, खतों को सम्भाल कर रखना जरुरी था अगर किसी के हाथ लग गये तो रुसवाई का ख्याल भय पैदा करता! छुट्टियों में वो अपने ' देस ' जाती तो मेरे प्राण लेकर... फोन का जुगाड था नही...
  9. ये बहुत अच्छी बात है लेकिन बदले गए इन पुराने खंबों का क्या होगा? … क्या उन्हें पुन: इस्तेमाल के लिए संभाल कर रखा जाएगा या फिर किसी दिन उन्हें निष्क्रिय एवं नाकारा घोषित कर किसी स्क्रैप डीलर को कबाड़ के भाव तौल दिया जाएगा? … मेरा मन कहता है कि पुरानी चीज़ों को सम्भाल कर रखना बेवाकूफी से बढकर कुछ नहीं है …
  10. प्रसंगवश अशोक सिंघई के पहले प्रकाशन प्रदीर्घ कविता ‘ अलविदा बीसवीं सदी ' का लोकार्पण फरवरी, 2000 में विश्व पुस्तक मेला में एवं तीसरे काव्य संग्रह ‘ सम्भाल कर रखना अपनी आकाशगंगा ' का भी लोकार्पण छत्तीसगढ़ की न्यायधानी बिलासपुर में नवम्बर, 2004 में प्रख्यात साहित्यकार स्वर्गीय श्रीकान्त वर्मा एवं कीर्तिशेष सम्पादक, कवि व उपन्यासकार गुलशेर अहमद शानी की स्मृति में आयोजित ‘ कविता की पंचाट ‘ में श्री केदार नाथ सिंह ने ही किया था।
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