देश के घर sentence in Hindi
pronunciation: [ desh ke ghar ]
Examples
- होवे किराया चाहते हो सकता; एक जन्मदिन का जश्न; एक विशेष अवसर या बस एक साथ मिलता है आनंद लेने के लिए अपने परिवार और दोस्तों के लिए एक रात के लिए एक देश के घर होटल को काम पर रखने.
- देश की माटी देश का जल हवा देश की देश के फल सरस बनें प्रभु सरस बने देश के घर और देश के घाट देश के वन और देश के बाट सरल बनें प्रभु सरल प्रभु देश के तन और देश के मन देश के घर के भाई-बहन विमल बनें प्रभु विमल बनें-[...]
- देश की माटी देश का जल हवा देश की देश के फल सरस बनें प्रभु सरस बने देश के घर और देश के घाट देश के वन और देश के बाट सरल बनें प्रभु सरल प्रभु देश के तन और देश के मन देश के घर के भाई-बहन विमल बनें प्रभु विमल बनें-[...]
- बड़े फार्महाउस या देश के घर के मालिकों को अब अन्य हीटिंग के रूप में इटली बिजली में गैस की तुलना में अन्य स्रोतों पर विचार कर रहे हैं शायद ही कभी हीटिंग प्रयोजनों के लिए प्रयोग किया जाता है ले जाने के लिए, और गैस, दोनों शहर गैस और एलपीजी आम ज्यादातर घरों में हीटिंग के लिए इस्तेमाल ईंधन रहे हैं.
- खबरिया चैनलों पर अपराधियों का जिस तरह से महिमा मंडन किया जाता है उसको देखकर तो ऐसा लगता है कि इस देश में लोगों को अपनी प्रतिभा का उपयोग साहित्य, संस्कृति, शास्त्रीय गायन या पारंपरिक कला पर काम करने की बजाय हत्या, अपहरण और बलात्कार करने में करना चाहिए ताकि खबरिया चैनल वाले उसकी प्रतिभा को देश के घर घर से तत्काल परिचित करा सके।
- देश की भाषा विदेश तक पहुंचे, यह हमारी परीक्षा है, कहाँ तक हम निभा पाते हैं, कितना सींच पाते है इसे अपना व्यहवार से, दुलार से ताकि इसकी जडों में पुख्तगी आ सके, और यह लोरी बनकर देश, प्रवासी देश के घर घर में जहां एक हिंदुस्तानी का दिल धडकता है, वहां गूज बन कर फिज़ाओं में फैलती रहे, जिसका विस्तार आकाश की बुलंदियों से ऊँचा हो.
- देश की भाषा विदेश तक पहुंचे, यह हमारी परीक्षा है, कहाँ तक हम निभा पाते हैं, कितना सींच पाते है इसे अपना व्यहवार से, दुलार से ताकि इसकी जडों में पुख्तगी आ सके, और यह लोरी बनकर देश, प्रवासी देश के घर घर में जहां एक हिंदुस्तानी का दिल धडकता है, वहां गूज बन कर फिज़ाओं में फैलती रहे, जिसका विस्तार आकाश की बुलंदियों से ऊँचा हो.
- अगर हम अपने देसी चैनलों को खोलकर देखते हैं तो ऐसा लगता है मानो इस देश के घर घर में या तो सास बहुओं ने एक दूसरे के खिलाफ मोर्चा खोल रखा है या फिर घर के बाहर का नजारा देखते हैं तो न्यूज़ चैनलों को देखकर ऐसा लगता है मानो इस देश के चप्पे चप्पे में बलात्कार, हत्या, लूट, दहेज हत्या, अपहरण, जैसी घटनाएं हमारी सांस्कृतिक पहचान हो गई है।
- देश की भाषा विदेश तक पहुंचे, यह हमारी परीक्षा है, कहाँ तक हम निभा पाते हैं, कितना सींच पाते है इसे अपना व्यहवार से, दुलार से ताकि इसकी जडों में पुख्तगी आ सके, और यह लोरी बनकर देश, प्रवासी देश के घर घर में जहां एक हिंदुस्तानी का दिल धडकता है, वहां गूज बन कर फिज़ाओं में फैलती रहे, जिसका विस्तार आकाश की बुलंदियों से ऊँचा हो. जय हिं द.