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त्याग करने वाला sentence in Hindi

pronunciation: [ tyag karane vala ]
त्याग करने वाला meaning in English

Examples

  1. बोधायन ऋषि माता-पिता एवं गुरू का त्याग करने वाला, उनकी निंदा करने वाला, उन्हें प्रताड़ित करने वाला मनुष्य समस्त वेदों का ज्ञाता होने पर भी यज्ञादि को करने का अधिकारी नहीं होता।
  2. और देखिये उनका कौशल कि राम को बदनाम करने के ध्येय को छिपाने के लिये राम को एक तरह से लोक का सम्मान करने वाला राजा घोषित कर दिया, तथा सबसे बड़ा त्याग करने वाला भी।
  3. और देखिये उनका कौशल कि राम को बदनाम करने के ध्येय को छिपाने के लिये राम को एक तरह से लोक का सम्मान करने वाला राजा घोषित कर दिया, तथा सबसे बड़ा त्याग करने वाला भी।
  4. श्लोक का शाब्दिक अर्थ अगर निकाला जाए तो यह है-कौवे जैसी जिज्ञासा, बगुले जैसा ध्यान, कुत्ते जैसी नींद और कम खाने वाला, घर का त्याग करने वाला यह पांच लक्षण शिष्य के होने चाहिए।
  5. भावार्थ: श्री भगवान बोले-जो पुरुष कर्मफल का आश्रय न लेकर करने योग्य कर्म करता है, वह संन्यासी तथा योगी है और केवल अग्नि का त्याग करने वाला संन्यासी नहीं है तथा केवल क्रियाओं का त्याग करने वाला योगी नहीं है॥1॥
  6. भावार्थ: श्री भगवान बोले-जो पुरुष कर्मफल का आश्रय न लेकर करने योग्य कर्म करता है, वह संन्यासी तथा योगी है और केवल अग्नि का त्याग करने वाला संन्यासी नहीं है तथा केवल क्रियाओं का त्याग करने वाला योगी नहीं है॥1॥
  7. भावार्थ: श्री भगवान बोले-जो पुरुष कर्मफल का आश्रय न लेकर करने योग्य कर्म करता है, वह संन्यासी तथा योगी है और केवल अग्नि का त्याग करने वाला संन्यासी नहीं है तथा केवल क्रियाओं का त्याग करने वाला योगी नहीं है॥ 1 ॥
  8. भावार्थ: श्री भगवान बोले-जो पुरुष कर्मफल का आश्रय न लेकर करने योग्य कर्म करता है, वह संन्यासी तथा योगी है और केवल अग्नि का त्याग करने वाला संन्यासी नहीं है तथा केवल क्रियाओं का त्याग करने वाला योगी नहीं है॥ 1 ॥
  9. वह यह गोल मोल (झूठ) कहता है कि “ मैं बड़ा महान त्यागी हूँ | तो मैं “ गुरुजनों ” के रक्त से सने राज सुख त्याग कर, युद्ध से मिलने वाले लाभ को त्याग कर, भीख मांग कर अपने जीवन को काटने का महान त्याग करने वाला हूँ | ”
  10. सन्यासी कैसा होना चाहिए-इस संदर्भ में विदुर जी का स्पष्ट मत है कि ‘ जो क्रोध न करने वाला, ढेला-पत्थर और स्वर्ण को एक-सा समझने वाला, शोकहीन, संधि-विग्रह से रहित निंदा-प्रशंसा से शून्य, प्रिय-अप्रिय का त्याग करने वाला तथा कर्मफल के प्रति उदासीन है, वही सन्यासी है।
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