पपैया meaning in Hindi
[ pepaiyaa ] sound:
पपैया sentence in Hindi
Meaning
संज्ञा- एक पेड़ का बड़ा, मीठा और लंबोतरा फल जो खाया जाता है:"माँ कच्चे पपीते की तरकारी बना रही है"
synonyms:पपीता, रेंड़ खरबूजा, पपीतिया, अंडखरबूजा, मधुकर्कटी, नलिकादल, एरंडचिर्भिट, वातकुंभ - एक प्रकार का पेड़ जिसके बड़े, मीठे और लंबोतरे फल खाए जाते हैं और इसकी लकड़ी का कुछ विशेष उपयोग नहीं होता है:"श्याम ने पपीते को जड़ से काट दिया"
synonyms:पपीता, रेंड़ खरबूजा, पपीतिया, अंडखरबूजा, मधुकर्कटी, नलिकादल, एरंडचिर्भिट, वातकुंभ - वर्षा और वसंत ऋतु में सुरीली ध्वनि में बोलने वाला एक पक्षी:"चातक स्वाति नक्षत्र की एक बूँद के लिए तरसते हैं"
synonyms:चातक, पपीहा, कपिंजल, कपिञ्जल, कुक्कू, डाहुक, पिंगल, पिङ्गल, वारिद्र, हुडुक, पिकांग, पिकाङ्ग, धाराट, दात्यूह, दिवौका, कपिञ्जल, वर्षप्रिय, नभनीरप, वृष्टिजीवन, नभोंबु, नभोम्बु, मुगूह, मेघजीवक, मेघजीवन, बहुक, वर्षाप्रिय, तेजल, तोतक, घनतोल, त्रिशंकु, त्रिशङ्कु - आम का नया निकलता हुआ पौधा:"रानी ने अमोले को उखाड़कर घर के पीछे लगा दिया"
synonyms:अमोला - अमोले को गुठली सहित उखाड़कर उसकी गुठली को घिसकर बनाई हुई सीटी :"किशोर पपैया बजा रहा है"
Examples
More: Next- रुत आई पपैया थारे बोलण री
- इन गुठलियों को घिस कर उनका पपैया बनाते और उस को बजाते हुए स्कूल जाते।
- दादुर मोर पपैया बोले , कुंजन बग्पांत उडानी ॥१॥ घनकी गरज सुन, सुधी ना रही कछु, बदरन देख डरानी ।
- होली से १५ दिन पहले लोग अपने चंग ( बड़े बड़े डफ) निकाल लेते थे और हर गली कूचे में चंग और मजीरों के साथ कुछ सुरीली आवाजें गूंजने लगती थीं “हमैं रुत आई रे पपैया थारै बोलण री रुत आई रे............... ढमक ढमक टक ढमक ढमक .............” गीत बहुत से हुआ करते थे.
- होली से १ ५ दिन पहले लोग अपने चंग ( बड़े बड़े डफ ) निकाल लेते थे और हर गली कूचे में चंग और मजीरों के साथ कुछ सुरीली आवाजें गूंजने लगती थीं “ हमैं रुत आई रे पपैया थारै बोलण री रुत आई रे ............... ढमक ढमक टक ढमक ढमक ............. ” गीत बहुत से हुआ करते थे .
- ‘‘ सावण आयो रे ‘‘ अलबम में सावण आयो रे , आई सावणिया री तीज , आयो आयो तीज तिंवार , सावण रा सूवटिया जैसे सरस- सुरीले लोकगीत है तो चैमासा , रामू चनणा झिरमिर झिरमिर रे , हिण्डो तो घला दे तथा रूत आई रे पपैया जैसे मर्म को स्पर्ष करने वाले भाव प्रधान लोकगीत मिलन-विरह की सावन फुहारों से तन-मन को भिगो देने वाले गीत समाहित किए गए है।
- पश्चिमी राजस्थान की ही बात करें तो इन्द्र राजा को रिझाने की दृष्टि से जैसलमेरी मल्हार ' बरसाला ' अंतर्गत ' था बिना हारो चौमासो लूवो जाए ' , राजस्थानी मल्हार '' जल भरियो हबोला खाय तणिया रेशम की ' , शास्त्रीय ' सावन के घर आ साजन , सावन के घर आ , मोर बोले , पपैया बोले , कोयल गीत सुनाए , साजन सावन के घर आ ' की मनमोहक प्रस्तुति मंत्रमुग्ध कर देती हैं।
- पश्चिमी राजस्थान की ही बात करें तो इन्द्र राजा को रिझाने की दृष्टि से जैसलमेरी मल्हार ' बरसाला ' अंतर्गत ' था बिना हारो चौमासो लूवो जाए ' , राजस्थानी मल्हार '' जल भरियो हबोला खाय तणिया रेशम की ' , शास्त्रीय ' सावन के घर आ साजन , सावन के घर आ , मोर बोले , पपैया बोले , कोयल गीत सुनाए , साजन सावन के घर आ ' की मनमोहक प्रस्तुति मंत्रमुग्ध कर देती हैं।
- स्थानीय स्तर पर वर्षा होने के संकेत- चींटी मुँह में अंडे लेकर ऊपर को चढ़े , पूर्व या उत्तर की पवन चलने लगे, सूर्य अधिक तपने लगे, चिड़िया धूल या रेत में स्नान करे, गाय सूर्य की तरफ मुँह कर देखने लगे, पपैया (पपीहा) पी-पी निरंतर बोले, मेंढक जमीन पर फिरे और बोले, बिल्ली और कुत्ता नाखून से जमीन खोदे, कुत्ता घर से बाहर न जाए, थान पर घोड़े उछलने लगें, प्रातः उमस (गर्मी) हो जाए, कोयल बोले, हवा जल्दी-जल्दी अपनी दिशा बदल दे तो उस दिन स्थानीय रूप से अतिशीघ्र अच्छी वर्षा के अचूक संकेत होते हैं।