निजकृत meaning in Hindi
[ nijekrit ] sound:
निजकृत sentence in Hindi
Meaning
विशेषणExamples
More: Next- अगर जातक के शुभ कर्मों की वजह से शनिदेव अनुकूल होते हैं तो उसको धन-वैभव से परिपूर्ण कर देते हैं , अन्यथा उसके निजकृत अशुभ कर्मों की वजह से प्रतिकूलत फल भी देते हैं।
- अर्थात् जब शनिदेव चतुर्थ भाव से गोचर करते हैं तो जातक के निजकृत पूर्व के अशुभ कर्मों के फलस्वरूप उसके भौतिक सुखों यानी मकान व वाहन आदि में परेशानी पैदा होती है जिसका संकेत कुण्डली में शनिदेव की स्थिति दिया करती है।
- यहां जो कुछ भी बताने जा रहा हूं वह ज्योतिषीय दृष्टिकोण है और आपके निजकृत कर्मों द्वारा भाव , दशा, युति, दृष्टि आदि में शनि आपको आपके कर्मों के फल देंगे, इस बात को अवश्य ध्यान में रखते हुए इस आलेख को पढ़ें।
- अखण्ड परम धाम सेवा समिति के तत्वाधान में चल रहे भक्ति योग वेदान्त एवं संत सम्मेलन में आचार्य महामण्डलेश्वर युगपुरूष स्वामी परमानंद गिरिजी महाराज ने आज अपने आर्शीवचनों में कहा कि काह न काऊ सुख दु : ख कर दाता, निजकृत कर्म भोग सब ताता।
- लेकिन मेरे मित्रों मेरे जीवन भर की साधना और तपस्या का निचोड़ यह है कि शनि की महादशा , शनि की साढ़ेसाती, शनि की ढैय्या और शनि की दृष्टि के दौरान कोई भी शुभाशुभ फल आपको प्राप्त हो रहा है तो उसके पीछे शनिदेव का नहीं आपके निजकृत कर्मों का हाथ है।
- जब शनिदेव जातक के निजकृत अशुभ कर्मों की वजह से प्रतिकूल होते हैं तो जातक को जिस प्रकार सुनार सोने को आग में तपाकर गहनों में परिवर्तित कर देता है ठीक उसी प्रकार निजकृत कर्मों को भुगतवाकर एक सदाचारी मानव भी बनाता है और उसके लिए उसे बहुत से कष्टïों का सामना भी करना पड़ता है।
- जब शनिदेव जातक के निजकृत अशुभ कर्मों की वजह से प्रतिकूल होते हैं तो जातक को जिस प्रकार सुनार सोने को आग में तपाकर गहनों में परिवर्तित कर देता है ठीक उसी प्रकार निजकृत कर्मों को भुगतवाकर एक सदाचारी मानव भी बनाता है और उसके लिए उसे बहुत से कष्टïों का सामना भी करना पड़ता है।
- यह एक ज्योतिषिय विश्लेषण था पुन : आपको याद दिलाना चाहता हूँ कि हमें अपने जीवन में मिलने वाले सारे अच्छे या बुरे फल अपने निजकृत कर्मो के आधार पर है, इसलिए ग्रहों को दोष न दें और कर्म सुधारें और त्रिासूत्रिय नूस्खा अपने जीवन में अपनायें और मेरे बताये गए उपायों को अपने जीवन ममें प्रयोग में लायें आपके कष्ट जरुर समाप्त होंगे;
- यह एक ज्योतिषिय विश्लेषण था पुन : आपको याद दिलाना चाहता हूँ कि हमें अपने जीवन में मिलने वाले सारे अच्छे या बुरे फल अपने निजकृत कर्मो के आधार पर है , इसलिए ग्रहों को दोष न दें और कर्म सुधारें और त्रिासूत्रिय नूस्खा अपने जीवन में अपनायें और मेरे बताये गए उपायों को अपने जीवन ममें प्रयोग में लायें आपके कष्ट जरुर समाप्त होंगे ; त्रिसूत्रिय नुस्खा : नि : स्वार्थ भाव से माता-पिता की सेवा , पति-पत्नी का धर्मानुकूल आचरण , देश के प्रति समर्पण और वफादारी।