जाम्बवन्ती meaning in Hindi
[ jaamebventi ] sound:
जाम्बवन्ती sentence in Hindi
Meaning
संज्ञाExamples
More: Next- इस तरह कृष्ण की आठों पत्नियां थी- रुक्मणि , जाम्बवन्ती, सत्यभामा, कालिन्दी, मित्रबिन्दा, सत्या, भद्रा और लक्ष्मणा।
- इस तरह कृष्ण की आठों पत्नियां थी- रुक्मणि , जाम्बवन्ती, सत्यभामा, कालिन्दी, मित्रबिन्दा, सत्या, भद्रा और लक्ष्मणा।
- जाम्बवन्त ने भगवान श्री कृष्ण की अनेक प्रकार से स्तुति की और अपनी कन्या जाम्बवन्ती का विवाह उनसे कर दिया।
- जाम्बवन्त ने भगवान श्री कृष्ण की अनेक प्रकार से स्तुति की और अपनी कन्या जाम्बवन्ती का विवाह उनसे कर दिया।
- श्री कृष्ण अपनी आठों रानियों - रुक्मणी , जाम्बवन्ती, सत्यभामा, कालिन्दी, मित्रबिन्दा, सत्या, भद्रा और लक्ष्मणा - के साथ द्वारिका में सुखपूर्वक रहे थे कि एक दिन उनके पास देवराज इन्द्र ने आकर प्रार्थना की, “हे कृष्ण! प्रागज्योतिषपुर के दैत्यराज भौमासुर के अत्याचार से देवतागण त्राहि-त्राहि कर रहे हैं।
- श्री कृष्ण अपनी आठों रानियों - रुक्मणी , जाम्बवन्ती, सत्यभामा, कालिन्दी, मित्रबिन्दा, सत्या, भद्रा और लक्ष्मणा - के साथ द्वारिका में सुखपूर्वक रहे थे कि एक दिन उनके पास देवराज इन्द्र ने आकर प्रार्थना की, “हे कृष्ण! प्रागज्योतिषपुर के दैत्यराज भौमासुर के अत्याचार से देवतागण त्राहि-त्राहि कर रहे हैं।
- इसके ठीक विपरीत कृष्ण को सदैव ही गृहस्थी का सुख मिला है , रुक्मणी ; जाम्बवन्ती ; सत्यभामा ; कालिन्दी ; मित्रबिन्दा ; सत्या ; भद्रा ; लक्ष्मणा आठ पटरानियों के साथ ही साथ उनकी शेष सभी रानियाँ सदैव उनकी सेवा में प्रस्तुत रहती हैं किन्तु वे स्वयं को ब्रह्मचारी कहते हैं।
- इसके ठीक विपरीत कृष्ण को सदैव ही गृहस्थी का सुख मिला है , रुक्मणी ; जाम्बवन्ती ; सत्यभामा ; कालिन्दी ; मित्रबिन्दा ; सत्या ; भद्रा ; लक्ष्मणा आठ पटरानियों के साथ ही साथ उनकी शेष सभी रानियाँ सदैव उनकी सेवा में प्रस्तुत रहती हैं किन्तु वे स्वयं को ब्रह्मचारी कहते हैं।
- श्री कृष्ण अपनी आठों रानियों - रुक्मणी , जाम्बवन्ती , सत्यभामा , कालिन्दी , मित्रबिन्दा , सत्या , भद्रा और लक्ष्मणा - के साथ द्वारिका में सुखपूर्वक रहे थे कि एक दिन उनके पास देवराज इन्द्र ने आकर प्रार्थना की , ” हे कृष्ण ! प्रागज्योतिषपुर के दैत्यराज भौमासुर के अत्याचार से देवतागण त्राहि-त्राहि कर रहे हैं।
- श्री कृष्ण अपनी आठों रानियों - रुक्मणी , जाम्बवन्ती , सत्यभामा , कालिन्दी , मित्रबिन्दा , सत्या , भद्रा और लक्ष्मणा - के साथ द्वारिका में सुखपूर्वक रहे थे कि एक दिन उनके पास देवराज इन्द्र ने आकर प्रार्थना की , ” हे कृष्ण ! प्रागज्योतिषपुर के दैत्यराज भौमासुर के अत्याचार से देवतागण त्राहि-त्राहि कर रहे हैं।