उद्भिज्ज meaning in Hindi
[ udebhijej ] sound:
उद्भिज्ज sentence in Hindi
Meaning
संज्ञाExamples
More: Next- उद्भिज्ज ( बीज से पैदा होने वाले )
- उद्भिज्ज में भोग नहीं होता , अत: इसे शरीर कहना ठीक नहीं है।
- उद्भिज्ज ] चार खानों और चौरासी लाख योनियों में चक्कर लगाता रहता है।।
- इनके अनुसार उद्भिज्ज ( जैसे पेड़-पौधे) को शरीर मानना उचित नहीं है, क्योंकि भोग (सुख-दु:ख की अनुभूति) केवल तीन शरीरों में ही होता है।
- समस्त भोग्य पदार्थ और अण्डज , स्वेदज, उद्भिज्ज, जरायुज जो कुछ भी स्थावर, जंगम मनुष्यादि प्राणीमात्र उसी पराशक्ति से उत्पन्न हुए (ऐसी यह पराशक्ति है)।
- यह अविनाशी जीव ( अण्डज , स्वेदज , जरायुज और उद्भिज्ज ) चार खानों और चौरासी लाख योनियों में चक्कर लगाता रहता है॥ 2 ॥
- भावार्थ : - चौरासी लाख योनियों में चार प्रकार के ( स्वेदज , अण्डज , उद्भिज्ज , जरायुज ) जीव जल , पृथ्वी और आकाश में रहते हैं , उन सबसे भरे हुए इस सारे जगत को श्री सीताराममय जानकर मैं दोनों हाथ जोड़कर प्रणाम करता हूँ॥ 1 ॥
- भावार्थ : - चौरासी लाख योनियों में चार प्रकार के ( स्वेदज , अण्डज , उद्भिज्ज , जरायुज ) जीव जल , पृथ्वी और आकाश में रहते हैं , उन सबसे भरे हुए इस सारे जगत को श्री सीताराममय जानकर मैं दोनों हाथ जोड़कर प्रणाम करता हूँ॥ 1 ॥
- इस प्रकार समष्टि मनोभाव को प्राप्त हुआ हिरण्यर्भनामक ब्रह्म स्वयं ही ( दूसरे द्वारा बोध पाये बिना ही ) पूर्ववासना के अनुसार विराट्-भाव को , भुवन आदि भाव को और वहाँ पर स्वेदज , उद्भिज्ज , अण्डज और जरायुज रूप चार प्रकार के जीवभावों का नित्य संकल्प करता रहता है।
- इस प्रकार समष्टि मनोभाव को प्राप्त हुआ हिरण्यर्भनामक ब्रह्म स्वयं ही ( दूसरे द्वारा बोध पाये बिना ही ) पूर्ववासना के अनुसार विराट्-भाव को , भुवन आदि भाव को और वहाँ पर स्वेदज , उद्भिज्ज , अण्डज और जरायुज रूप चार प्रकार के जीवभावों का नित्य संकल्प करता रहता है।